यूपी के 95 हजार बुनकरों को बड़ी राहत! 20 किलोवाट तक मिलेगी फ्लैट रेट बिजली|
उत्तर प्रदेश के बुनकरों को बड़ी राहत की तैयारी, फ्लैट रेट बिजली योजना का दायरा 20 किलोवाट तक बढ़ाने का प्रस्तावमुख्य बिंदु
- फ्लैट रेट बिजली योजना की सीमा 5 किलोवाट से बढ़ाकर 20 किलोवाट करने की तैयारी।
- लंबित बिजली बिल, सब्सिडी समायोजन और ओटीएस पर सरकार कर रही विचार।
- अगस्त में बुनकरों के बिजली बिलों की विशेष जांच अभियान चलेगा।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के लगभग 95 हजार पावरलूम बुनकरों को रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराने वाली अटल बिहारी वाजपेयी पावरलूम बुनकर विद्युत फ्लैट रेट योजना का दायरा बढ़ाने की दिशा में सरकार ने पहल शुरू कर दी है। मौजूदा 5 किलोवाट की सीमा को बढ़ाकर 20 किलोवाट तक करने के प्रस्ताव पर गंभीर मंथन चल रहा है।
सरकार केवल योजना के विस्तार पर ही नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित बिजली बिलों, सब्सिडी के समायोजन, ब्याज एवं विलंब शुल्क में राहत और वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) लागू करने जैसे मुद्दों पर भी विचार कर रही है। इससे हजारों बुनकरों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
बैठक में उठे बिजली संबंधी मुद्दे
मंगलवार को खादी भवन में आयोजित बैठक में खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने बुनकर प्रतिनिधियों के साथ विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की। बैठक के दौरान बिजली दरों, गलत बिलिंग, बकाया राशि, सब्सिडी, लोड बढ़ाने, मीटरिंग और नए बिजली कनेक्शन से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए।
सरकार ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में शून्य से 5 किलोवाट श्रेणी के छोटे बुनकरों को मिल रही फ्लैट रेट सुविधा में किसी प्रकार की कटौती नहीं की जाएगी। इस श्रेणी में प्रदेश के करीब 95 हजार बिजली कनेक्शन हैं, जो कुल पावरलूम कनेक्शनों का लगभग 94 प्रतिशत हिस्सा हैं।
5 से 20 किलोवाट वाले पावरलूम को मिलेगा लाभ
यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो पहली बार 5 से 20 किलोवाट क्षमता वाले पावरलूम भी फ्लैट रेट योजना के दायरे में शामिल हो जाएंगे। फिलहाल सरकार इस योजना पर हर वर्ष लगभग 600 करोड़ रुपये खर्च करती है। योजना का विस्तार होने पर करीब 189 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आने का अनुमान है।
लंबित बिलों और सब्सिडी की होगी समीक्षा
बैठक में बुनकर संगठनों ने शिकायत की कि कई मामलों में सरकारी सब्सिडी मिलने के बावजूद बिजली बिलों में बकाया राशि दिखाई जा रही है। इस पर वर्ष 2006 की नीति के तहत 31 मार्च 2023 तक के बकाया, ब्याज और विलंब शुल्क की समीक्षा करने तथा किस्तों में भुगतान और ओटीएस लागू करने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई।
सरकार ने अगस्त माह में विशेष अभियान चलाकर बुनकरों के बिजली बिलों की जांच कराने का भी निर्णय लिया है, ताकि गलत बिलिंग और अन्य विसंगतियों को दूर किया जा सके।
बंद कनेक्शनों के मामलों की भी होगी जांच
लंबे समय से बंद पड़े या मृत उपभोक्ताओं के नाम पर दर्ज बिजली कनेक्शनों से जुड़े बकाया मामलों की भी अलग से समीक्षा की जाएगी। मंत्री राकेश सचान ने कहा कि बैठक में प्राप्त सुझावों, ऊर्जा विभाग के आंकड़ों और राज्य की वित्तीय स्थिति का मूल्यांकन करने के बाद बुनकरों के हित में व्यावहारिक और संतुलित निर्णय लिया जाएगा।
बैठक में स्टांप एवं पंजीयन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल तथा अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी भी उपस्थित रहे।
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